गेहूँ की उपलब्ध किस्में
LOK-1 (लोक-1)
उपलब्ध- प्रकार
- रोटी गेहूँ
- बीज दर
- 100 kg/ha
- बुवाई का समय
- अक्टूबर–नवम्बर
- विशेषता
- जल्दी पकने वाली, सीमित सिंचाई में उपयुक्त
HI-1544 (पूर्णा शरबती)
उपलब्ध- प्रकार
- शरबती रोटी गेहूँ
- बीज दर
- 100–125 kg/ha
- बुवाई का समय
- नवम्बर
- विशेषता
- चमकदार मोटा दाना, बाज़ार में अच्छी मांग
HI-1650 (Pusa Ojaswi) (पूसा ओजस्वी)
उपलब्ध- प्रकार
- रोटी गेहूँ
- बीज दर
- 125 kg/ha
- बुवाई का समय
- नवम्बर
- विशेषता
- पूर्ण सिंचाई में अधिक उपज, रतुआ सहनशील
GW-322 (जी.डब्ल्यू.-322)
उपलब्ध- प्रकार
- रोटी गेहूँ
- बीज दर
- 100–125 kg/ha
- बुवाई का समय
- नवम्बर
- विशेषता
- मालवा में लोकप्रिय, चपाती गुण उत्तम
HI-8759 (Pusa Tejas) (पूसा तेजस)
उपलब्ध- प्रकार
- कठिया (डुरम) गेहूँ
- बीज दर
- 125 kg/ha
- बुवाई का समय
- नवम्बर
- विशेषता
- सूजी–पास्ता हेतु कठिया, मोटा चमकीला दाना
WH-147 (डब्ल्यू.एच.-147)
उपलब्ध- प्रकार
- रोटी गेहूँ
- बीज दर
- 125–150 kg/ha
- बुवाई का समय
- नवम्बर–दिसम्बर
- विशेषता
- मजबूत पौधा, देर से बुवाई में भी भरोसेमंद
बैग पर छपा ट्रुथफुल लेबल
हर बोरी पर यही मानक छपे होते हैं — खरीदते समय लॉट नंबर एवं वैधता की तारीख अवश्य जाँचें।
Truthful Lable
गेहूँ बीज
- अंकुरण (न्यूनतम) / Germination (Min.)
- 85%
- भौतिक शुद्धता (न्यूनतम) / Physical Purity (Min.)
- 98%
- आनुवंशिक शुद्धता (न्यूनतम) / Genetic Purity (Min.)
- 95%
- खरपतवार बीज (अधिकतम) / Weed Seeds (Max.)
- 10 / kg
- नमी (अधिकतम) / Moisture (Max.)
- 12%
- Non-GMO
- Graded & Treated
- Lot Traceable
प्रत्येक लॉट प्रमाणीकरण मानकों के अनुसार परीक्षित। मूल्य बैग पर छपे लेबल अनुसार मान्य।
गेहूँ की आदर्श कृषि कार्यमाला
गेहूँ की भरपूर उपज पाने के लिए एवं उत्पादित बीज की गुणवत्ता बनाए रखने की दृष्टि से निम्नानुसार कृषि कार्यमाला की सिफारिश की जाती है।
01खेत की तैयारी
खरीफ फसल की कटाई के पश्चात एक या दो (आड़ी एवं खड़ी) जुताई कर के पाटा चलाएं। बुवाई के पूर्व गोबर की खाद 5–10 टन प्रति हैक्टेयर दें, साथ ही 3 से 4 क्विंटल एन.पी.के. उर्वरक को भी अच्छी तरह गोबर की खाद या खेत की मिट्टी में मिलाकर बखरनी के समय खेत में फैला दें।
02किस्म का चयन
खेती के समय तथा सिंचाई जल की उपलब्धता के अनुसार गेहूँ की किस्म का चुनाव करें। क्षेत्र की भूमि की मांग अनुसार सिंचाई की संख्या बढ़ाएं।
03बीज की मात्रा एवं बुवाई
छोटे दानों की किस्मों के लिए 100 किलो प्रति हैक्टेयर तथा बड़े दानों वाली किस्मों का 125 किलो प्रति हैक्टेयर बीज उपयोग में लाना चाहिए। लेट से बुवाई की अवस्था में बीज की दर में 20–25 प्रतिशत बढ़ोतरी करना लाभदायक एवं 20–25 प्रतिशत कमी करना अनावश्यक है। बीज की बुवाई 8–9 इंच कतार से कतार की दूरी पर करें।
04खाद एवं उर्वरक
नत्रजन 100–120 कि.ग्रा., फॉस्फोरस 50–60 कि.ग्रा., पोटाश 25–30 कि.ग्रा. प्रति हैक्टेयर दें। खाद को बुवाई के समय मिलाना चाहिए। नत्रजन की लगभग 1/2 मात्रा बुवाई के समय, 1/4 मात्रा पहली सिंचाई के साथ और शेष 1/4 मात्रा दूसरी सिंचाई के साथ दें।
05सिंचाई
मेड़ बांधकर सिंचाई करें। छोटी-छोटी, आड़ी व खड़ी, दोनों तरह से सिंचाई की क्यारी बनाकर सिंचाई करने से पानी की कम मात्रा से अधिक क्षेत्रफल की सिंचाई की जा सकती है। ध्यान रखें, आवश्यकता से अधिक सिंचाई करने पर दानों में दुर्बलता आ जाती है तथा उपज कम हो जाती है।
06फसल की कटाई
बीजोत्पादन कार्यक्रम के अंतर्गत आई हुई फसल की कटाई कम्बाईन अथवा हार्वेस्टर से न कराएं। यदि मशीनरी का उपयोग किया जाता है तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि कटाई मशीन में किसी भी प्रकार से पूर्व के अवशेष बीज आदि न छूटें, मशीन पूर्णरूप से साफ होनी चाहिए।
07फसल की गहाई
बीज की शुद्धता बनाए रखने हेतु गहाई पूर्व क्षेत्र को अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए। गहाई करते समय बीज को अधिक चोट न पहुँचे इसका विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
08विशेष
यदि बीज उपलब्ध नहीं है तो पैदावार में रखी गई फसल को बीज समान रूप से मिलाकर ही बोएँ।
